कैसे निकले लड़की घर से बाहर,हर तरफ दरिंदे है छाये,कभी निर्भया, कभी अंकिता, तो कभी मासूम बच्ची को तड़पाए।।जिसे पता नहीं जिस्म काउसे क्यो तुम तड़पाते हो,ऐसा करने में तुमक्यों खुद में मर नही जाते हो।।अंधेरी काली सड़कों पर चलने से,आज भी मन घबराता है,“कुछ हो न जाए कुछ खो न जाए”इस बात से मन…